🌸 11 अक्टूबर 2026: माँ शैलपुत्री पूजा विधि 2026
शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माँ शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री और देवी पार्वती का स्वरूप माना जाता है।
माँ का स्वरूप अत्यंत सरल, शांत और दिव्य है। वे वृषभ अर्थात् बैल पर विराजमान रहती हैं तथा उनके हाथों में त्रिशूल और कमल सुशोभित रहते हैं।
यदि आपको पूजा की पूरी विधि नहीं आती, तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इस लेख में माँ शैलपुत्री की पूजा को बहुत सरल भाषा में क्रम-बद्ध तरीके से बताया गया है, ताकि घर पर श्रद्धा के साथ पूजा करने वाला कोई भी भक्त इसे आसानी से समझ सके।
🌺 1. माँ शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप
माँ शैलपुत्री नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। 'शैल' का अर्थ पर्वत होता है और पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें 'शैलपुत्री' कहा जाता है।
माँ शैलपुत्री का वाहन वृषभ अर्थात् बैल है। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित रहता है।
माँ को पार्वती और हेमवती नामों से भी जाना जाता है। देवी के इस स्वरूप में शक्ति, स्थिरता, सरलता और प्रकृति से जुड़ी दिव्य भावना का स्मरण किया जाता है।
🌺 2. माँ शैलपुत्री का मुख्य मंत्र
इस मंत्र का जाप 11, 21 या 108 बार अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार किया जा सकता है।
🌸 3. माँ शैलपुत्री की प्रार्थना
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
मैं उन यशस्विनी माँ शैलपुत्री को प्रणाम करता हूँ, जो वृषभ पर विराजमान हैं, जिनके हाथ में त्रिशूल है और जिनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है। हे माता! अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखें।
🌺 4. माँ शैलपुत्री का ध्यान
पूजा के समय कुछ क्षण शांत होकर माता के स्वरूप का ध्यान करें।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थिताम्।
प्रथम दुर्गा त्रिनेत्रां पटाम्बर परिधानाम्॥
रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिताम्।
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम्॥
कमनीयां लावण्यां सुस्मुखीं क्षीणमध्यां नितम्बनीम्॥
ध्यान में माँ को शांत, तेजस्वी और दिव्य स्वरूप में देखें। माता वृषभ पर विराजमान हैं, उनके हाथ में त्रिशूल और कमल है तथा उनका मुख करुणा और दिव्य तेज से प्रकाशित है।
🌼 5. माँ शैलपुत्री की स्तुति
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जो देवी समस्त प्राणियों में माँ शैलपुत्री के स्वरूप में विद्यमान हैं, उन जगतजननी देवी को बार-बार नमस्कार है।
🪔 6. पूजा की सामग्री
माँ की पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री अनिवार्य नहीं है। श्रद्धा और स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण हैं।
🌺 माँ शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा
🪔 दीपक, घी या तेल और बत्ती
💧 स्वच्छ जल
🌹 रोली और अक्षत
🌼 पुष्प, विशेष रूप से उपलब्ध हो तो चमेली
🌿 धूप या अगरबत्ती
🍎 फल
🍚 सात्त्विक नैवेद्य
🥛 दूध या खीर
🌺 पूजा की थाली
🔱 यदि उपलब्ध हो तो कलश
🙏 7. घर पर माँ शैलपुत्री की सरल क्रमबद्ध पूजा विधि
🌺 चरण 1 — स्नान करके पूजा के लिए तैयार हों
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके माता की तस्वीर या प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें।
मन में माता का स्मरण करें और कहें:
हे माँ शैलपुत्री! मैं श्रद्धापूर्वक आपकी पूजा करने जा रहा/रही हूँ। मेरी पूजा स्वीकार करें और मेरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।
💧 चरण 2 — शुद्धिकरण करें
एक छोटे पात्र में स्वच्छ जल लें।
जल को अपने ऊपर और पूजा सामग्री के आसपास हल्के रूप से छिड़कते हुए तीन बार बोलें:
ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु।
ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु॥
इसके बाद माता को प्रणाम करें।
💧 चरण 3 — आचमन करें
दाहिने हाथ से थोड़ा-थोड़ा जल लेकर तीन बार ग्रहण करें।
पहली बार:
ॐ केशवाय नमः॥
दूसरी बार:
ॐ नारायणाय नमः॥
तीसरी बार:
ॐ माधवाय नमः॥
इसके बाद हाथ धो लें।
🪔 चरण 4 — दीपक और धूप प्रज्वलित करें
अब माता के सामने दीपक जलाएँ और धूप या अगरबत्ती प्रज्वलित करें।
दीपक जलाते समय सरल रूप से बोलें:
इसके बाद माता को प्रणाम करें।
🙏 चरण 5 — भगवान गणेश का स्मरण करें
पूजा के निर्विघ्न पूर्ण होने के लिए पहले भगवान गणेश का स्मरण करें।
बोलें:
फिर हाथ जोड़कर कहें:
🌺 चरण 6 — माँ शैलपुत्री का ध्यान करें
अब माता की तस्वीर के सामने शांत होकर कुछ क्षण बैठें।
माँ के दिव्य स्वरूप को मन में स्मरण करें और बोलें:
इसके बाद माँ शैलपुत्री का ध्यान श्लोक पढ़ें।
🌹 चरण 7 — माता को रोली और अक्षत अर्पित करें
माता को श्रद्धापूर्वक रोली और अक्षत अर्पित करें।
अर्पित करते समय बोलें:
🌸 चरण 8 — पुष्प अर्पित करें
माता को पुष्प अर्पित करें।
यदि चमेली का पुष्प उपलब्ध हो तो श्रद्धानुसार अर्पित कर सकते हैं।
पुष्प अर्पित करते समय बोलें:
इसके बाद हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
🕉️ चरण 9 — माँ का मुख्य मंत्र जाप करें
अब माता के मुख्य मंत्र का जाप करें:
इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप अपनी सुविधा के अनुसार करें।
मंत्र-जाप के समय मन को शांत रखें और माता के स्वरूप का ध्यान करें।
🌺 चरण 10 — माँ शैलपुत्री की प्रार्थना पढ़ें
अब यह प्रार्थना श्रद्धापूर्वक पढ़ें:
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
इसके बाद बोलें:
🌼 चरण 11 — माँ की स्तुति करें
अब पढ़ें:
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
इसके बाद माता को प्रणाम करें।
🍚 चरण 12 — माता को भोग अर्पित करें
माँ शैलपुत्री को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार सात्त्विक भोग अर्पित करें।
नवरात्रि के प्रथम दिन देसी घी का प्रसाद अर्पित करने की परंपरा भी बताई जाती है।
इसके साथ फल, दूध, खीर या घर में बना सात्त्विक प्रसाद भी अर्पित किया जा सकता है।
भोग लगाते समय कहें:
📿 चरण 13 — कुछ समय माता का ध्यान करें
भोग अर्पित करने के बाद कुछ मिनट शांत बैठें।
मन में माता का स्मरण करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रार्थना करें।
अपने परिवार, बच्चों, माता-पिता और सभी प्रियजनों के मंगल की कामना करें।
🪔 चरण 14 — माँ की आरती करें
अब दीपक लेकर माता की आरती करें।
आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार माँ शैलपुत्री की आरती कर सकते हैं।
आरती के बाद दीपक को सभी परिवार के सदस्यों को दिखाएँ और माता को प्रणाम करें।
📖 8. माँ शैलपुत्री की पावन कथा
माँ शैलपुत्री की कथा देवी पार्वती के पूर्व जन्म और पुनर्जन्म से जुड़ी हुई मानी जाती है।
पौराणिक परंपरा के अनुसार देवी ने पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती के रूप में जन्म लिया था। सती का विवाह भगवान शिव के साथ हुआ था।
एक समय राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया। देवी सती अपने पिता के यज्ञ में पहुँचीं, लेकिन वहाँ भगवान शिव के प्रति अपमानजनक व्यवहार देखकर वे अत्यंत दुखी हुईं।
अपने पति भगवान शिव के अपमान से आहत होकर देवी सती ने योगाग्नि द्वारा अपना शरीर त्याग दिया।
इसके बाद देवी ने पुनः पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। पर्वत की पुत्री होने के कारण उन्हें 'शैलपुत्री' कहा गया।
'शैल' का अर्थ पर्वत और 'पुत्री' का अर्थ बेटी होता है। इसलिए पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा।
बाद में देवी ने भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या की और अंततः भगवान शिव से उनका पुनः विवाह हुआ।
इसी कारण माँ शैलपुत्री के स्वरूप को देवी पार्वती के रूप से भी जोड़ा जाता है।
माँ शैलपुत्री का स्वरूप हमें यह प्रेरणा देता है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ आएँ, श्रद्धा, धैर्य और संकल्प का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
✨ 9. माँ शैलपुत्री की पूजा का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की आराधना करके भक्त अपने जीवन में स्थिरता, साहस, शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।
माँ का वृषभ वाहन स्थिरता और धैर्य की भावना का स्मरण कराता है। हाथ में त्रिशूल शक्ति का प्रतीक है और कमल पवित्रता एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।
माता की पूजा के समय भक्त अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर करने और जीवन को धर्म, संयम तथा सदाचार की दिशा में आगे बढ़ाने का संकल्प ले सकते हैं।
🙏 10. माँ शैलपुत्री से विशेष प्रार्थना
हे जगतजननी माँ शैलपुत्री!
हमारे जीवन में सुख, शांति और सद्बुद्धि प्रदान करें।
हमारे परिवार को स्वस्थ, सुरक्षित और सुखी रखें।
हमारे बच्चों को अच्छे संस्कार दें।
हमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य और साहस प्रदान करें।
हमारे मन से भय, चिंता और नकारात्मक विचारों को दूर करें।
हे माता! हमें सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।
समस्त संसार पर अपनी कृपा बनाए रखें।
🌺 सभी के जीवन में शांति हो।
🌺 सभी का मंगल हो।
🌺 सभी का कल्याण हो।
🌺 ॥ जय माता दी ॥ 🌺
🙏 11. पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥
हे माता! पूजा में जाने-अनजाने में जो भी त्रुटि हुई हो, उसे क्षमा करें और मेरी श्रद्धा को स्वीकार करें।
🌺 ॥ जय माता दी ॥ 🌺
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