⛰️ गोवर्धन पूजा कब है? जानिए 9 नवंबर 2026 को अन्नकूट पूजा, गोवर्धन तिथि, श्रीकृष्ण पूजा विधि, छप्पन भोग और पावन कथा
⛰️ गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट 2026 — तिथि और मुख्य मुहूर्त
📅 गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट — 9 नवंबर 2026, सोमवार
🌸 कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि प्रारंभ:
9 नवंबर 2026 को दोपहर लगभग 12:31–12:32 बजे
🌸 कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि समाप्त:
10 नवंबर 2026 को दोपहर लगभग 2:00 बजे
🙏 गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट:
इस लेख में निर्धारित पंचांग-क्रम के अनुसार 9 नवंबर 2026 को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा।
📌 काशी विशेष:
काशी क्षेत्र में प्रतिपदा तिथि के सूर्योदय-विचार के कारण 10 नवंबर 2026 को गोवर्धन पूजा का विशेष निर्णय माना जाता है।
🌺 सरल बात: गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत, गौ माता और अन्नकूट के रूप में प्रकृति एवं अन्न के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पावन पर्व है।
🌺 गोवर्धन पूजा 2026 — श्रीकृष्ण, प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता का महापर्व
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है। यह भगवान श्रीकृष्ण की उस दिव्य लीला की स्मृति में मनाया जाता है, जब उन्होंने ब्रजवासियों और उनकी गौ माता की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण किया था।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन स्वरूप, गौ माता और अन्नकूट का पूजन किया जाता है।
अन्नकूट का अर्थ है—अन्न का पर्वत। इस अवसर पर घरों और मंदिरों में अनेक प्रकार के पकवान बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाया जाता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के 24वें से 27वें अध्याय में गोवर्धन पूजा, इंद्र के अभिमान, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन धारण करने और ब्रजवासियों की रक्षा की कथा वर्णित है।
🌼 गोवर्धन पूजा के दिन किनकी पूजा की जाती है?
गोवर्धन पूजा के दिन मुख्य रूप से—
- 🙏 भगवान श्रीकृष्ण
- ⛰️ श्री गोवर्धन भगवान
- 🐄 गौ माता
- 🍚 अन्नकूट एवं छप्पन भोग
- 🌿 प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता
का पूजन किया जाता है।
घर में विधिपूर्वक पूजा करने वाले श्रद्धालु पहले गौरी-गणेश, कलश, षोडश मातृका, सप्तघृत मातृका और नवग्रह का पूजन करके मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण एवं गोवर्धन भगवान की पूजा कर सकते हैं।
यदि किसी परिवार में पूरी सामग्री उपलब्ध न हो तो उपलब्ध सामग्री के अनुसार श्रद्धा और सामर्थ्य से पूजा करना ही पर्याप्त है।
🪔 गोवर्धन पूजा की पूजन सामग्री
- भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र
- गोवर्धन पर्वत बनाने के लिए शुद्ध गोबर
- रोली, कुमकुम, हल्दी
- अक्षत
- चंदन
- पुष्प और माला
- तुलसी दल
- धूप और दीप
- घी
- कपूर
- कलश एवं शुद्ध जल
- पंचामृत
- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर
- वस्त्र
- नैवेद्य
- फल
- मिठाई
- विभिन्न प्रकार के अन्न एवं पकवान
- हरी घास
- गौ माता के लिए भोजन
- दक्षिणा
🍚 अन्नकूट के लिए: घर में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के सात्त्विक व्यंजन बनाकर भगवान को भोग लगाया जा सकता है।
🌺 गोवर्धन पूजा का संपूर्ण पूजन क्रम
गोवर्धन पूजा में पूजन क्रम को सरल रूप में इस प्रकार रखा जा सकता है—
1. शुद्धिकरण एवं संकल्प
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को स्वच्छ करें और भगवान का स्मरण करके संकल्प लें।
“मैं भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन भगवान और गौ माता की पूजा श्रद्धापूर्वक करता/करती हूँ। भगवान मेरे परिवार में आरोग्य, सुख, शांति, अन्न-धन और समृद्धि प्रदान करें।”
🌸 2. गौरी-गणेश पूजन
सबसे पहले भगवान गणेश और माता गौरी का पूजन करें।
गणेश ध्यान मंत्र
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
फिर—
कहते हुए पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, पंचामृत स्नान, शुद्धोदक स्नान, वस्त्र, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
माता गौरी के लिए—
कहते हुए चंदन, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
🪔 3. कलश पूजन
कलश में शुद्ध जल भरकर उसमें अक्षत, पुष्प आदि डालें।
कहते हुए चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
🌺 4. षोडश मातृका पूजन
परंपरा के अनुसार षोडश मातृकाओं का पूजन किया जा सकता है।
- ॐ गौर्यै नमः।
- ॐ पद्मायै नमः।
- ॐ शच्यै नमः।
- ॐ मेधायै नमः।
- ॐ सावित्र्यै नमः।
- ॐ विजयायै नमः।
- ॐ जयायै नमः।
- ॐ देवसेनायै नमः।
- ॐ स्वधायै नमः।
- ॐ स्वाहायै नमः।
- ॐ मातृभ्यः नमः।
- ॐ लोकमातृभ्यः नमः।
- ॐ धृत्यै नमः।
- ॐ पुष्ट्यै नमः।
- ॐ तुष्ट्यै नमः।
- ॐ कुलदेवतायै नमः।
प्रत्येक मातृका को अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
🌿 5. सप्तघृत मातृका पूजन
सप्तघृत मातृकाओं का पूजन परिवार की मंगलकामना और शुभता के लिए किया जा सकता है।
घृत से सात छोटे बिंदु अथवा प्रतीक बनाकर श्रद्धापूर्वक पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
☀️ 6. नवग्रह पूजन
नवग्रहों का स्मरण करके प्रत्येक ग्रह को अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
ॐ सोमाय नमः।
ॐ भौमाय नमः।
ॐ बुधाय नमः।
ॐ बृहस्पतये नमः।
ॐ शुक्राय नमः।
ॐ शनैश्चराय नमः।
ॐ राहवे नमः।
ॐ केतवे नमः।
अंत में—
कहकर सामूहिक पूजन करें।
🪔 7. भगवान श्रीकृष्ण का पूजन
अब गोवर्धन पूजा के मुख्य देवता भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें।
ध्यान
भगवान श्रीकृष्ण का मन में ध्यान करें— हाथ में गोवर्धन पर्वत धारण किए हुए, ब्रजवासियों और गौ माता की रक्षा करने वाले भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें।
आवाहन
आसन
पाद्य
अर्घ्य
आचमनीय
सामान्य स्नान
पंचामृत स्नान
शुद्धोदक स्नान
वस्त्र
यज्ञोपवीत
चंदन
अक्षत
पुष्प एवं तुलसी
धूप
दीप
नैवेद्य
भगवान को अन्नकूट एवं छप्पन भोग का भोग श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
⛰️ 8. गोवर्धन भगवान का पूजन
अब गोबर या उपलब्ध शुद्ध सामग्री से बनाए गए गोवर्धन स्वरूप का पूजन करें।
गोवर्धन स्वरूप को फूल, माला, रोली, अक्षत और दीप से सजाएं।
आवाहन मंत्र
पाद्य
अर्घ्य
स्नान
यदि गोवर्धन स्वरूप गोबर से बनाया गया हो तो वास्तविक जल से स्नान कराने के बजाय पुष्प, अक्षत और जल का सांकेतिक अर्पण करें।
चंदन और रोली
ॐ गोवर्धनाय नमः। रोलीं समर्पयामि।
अक्षत एवं पुष्प
धूप और दीप
नैवेद्य
🐄 9. गौ माता का पूजन
गोवर्धन पूजा में गौ माता का विशेष महत्व है।
यदि घर में गौ माता उपलब्ध हों तो उन्हें स्नान कराकर, साफ वस्त्र/माला से सजाकर, रोली या हल्दी से तिलक करें।
गौ माता को हरी घास, गुड़ या उपलब्ध सात्त्विक आहार खिलाएं।
कहते हुए पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
गौ माता की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा एवं प्रणाम करें।
🍚 10. अन्नकूट एवं छप्पन भोग
अन्नकूट गोवर्धन पूजा का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है।
भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के सात्त्विक व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।
- चावल
- दाल
- सब्जियां
- पूड़ी
- कचौरी
- खीर
- हलवा
- मिठाई
- दही
- दूध
- माखन
- फल
- विभिन्न प्रकार के पकवान
छप्पन भोग करना अनिवार्य नहीं है।
यदि 56 प्रकार के व्यंजन बनाना संभव न हो तो उपलब्ध सात्त्विक भोजन श्रद्धा से भगवान को अर्पित करें।
🔄 11. गोवर्धन परिक्रमा
यदि घर में गोवर्धन स्वरूप स्थापित करके पूजा की गई है तो श्रद्धापूर्वक उसकी परिक्रमा करें।
परिक्रमा करते समय भगवान श्रीकृष्ण का नाम स्मरण करें—
या
“श्री गोवर्धन महाराज की जय।”
घर में स्थान कम हो तो मन ही मन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का भाव करके प्रणाम किया जा सकता है।
🪔 12. आरती
अब भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन भगवान और गौ माता की आरती करें।
आरती के समय दीपक घुमाएं और परिवार के सभी सदस्य भगवान का स्मरण करें।
🌸 13. पुष्पांजलि
दोनों हाथों में पुष्प और अक्षत लेकर भगवान श्रीकृष्ण एवं गोवर्धन भगवान को समर्पित करें।
ॐ गोवर्धनाय नमः। पुष्पांजलिं समर्पयामि।
🙏 14. क्षमा प्रार्थना
पूजा में हुई किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए भगवान से क्षमा मांगें।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण से परिवार के सुख, आरोग्य, अन्न-धन, गौ-समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करें।
🌺 गोवर्धन पूजा का आध्यात्मिक संदेश
गोवर्धन पूजा केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें प्रकृति, अन्न, गौ माता और जीवन को सहारा देने वाले सभी साधनों के प्रति कृतज्ञ होना सिखाती है।
भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को यह समझाया कि जीवन के लिए जिन प्राकृतिक साधनों पर हमारा अस्तित्व निर्भर है, उनका सम्मान और संरक्षण भी हमारा धर्म है।
इस पर्व में अभिमान के स्थान पर विनम्रता, दिखावे के स्थान पर कृतज्ञता और केवल मांगने के स्थान पर प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश मिलता है।
📜 शास्त्रीय आधार
गोवर्धन पूजा की मूल कथा का प्रमुख शास्त्रीय आधार श्रीमद्भागवत महापुराण, दशम स्कंध, अध्याय 24 से 27 है।
दशम स्कंध के 24वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत, गौ और ब्राह्मणों के सम्मान की बात तथा विविध प्रकार के अन्न-पकवान तैयार करके पूजा करने की प्रेरणा का वर्णन मिलता है।
दशम स्कंध के 25वें अध्याय में इंद्र के क्रोधित होने, भयंकर वर्षा होने और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण करके ब्रजवासियों की रक्षा करने का वर्णन मिलता है।
📖 गोवर्धन पूजा की पावन कथा
एक समय ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण ने देखा कि नंद बाबा और सभी ब्रजवासी देवराज इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने नंद बाबा से पूछा कि यह पूजा किस उद्देश्य से की जा रही है और इससे क्या फल प्राप्त होता है।
श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि उनका जीवन गो, गोचर भूमि, वन और गोवर्धन पर्वत से जुड़ा हुआ है। इसलिए उन्हें उन साधनों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए जिनसे उनका जीवन चलता है।
श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के 24वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गौ, ब्राह्मण और गोवर्धन की पूजा करने तथा अनेक प्रकार के भोजन तैयार करने की प्रेरणा का वर्णन है।
ब्रजवासियों ने श्रीकृष्ण की बात स्वीकार की और अनेक प्रकार के पकवान तैयार करके गोवर्धन पर्वत की पूजा की। उन्होंने गौ माता को भोजन कराया और गोवर्धन की परिक्रमा की।
देवराज इंद्र को जब यह पता चला कि ब्रजवासियों ने उनकी पूजा नहीं की, तो उन्हें क्रोध आ गया।
इंद्र ने ब्रज पर भयंकर वर्षा करवा दी। तेज आंधी, वर्षा और जलप्रलय से ब्रजवासी भयभीत हो गए।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठा लिया और सभी ब्रजवासियों तथा गौ माता को उसके नीचे आश्रय दिया।
श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को धारण करके ब्रजवासियों की रक्षा की।
जब देवराज इंद्र को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य शक्ति का बोध हुआ तो उनका अभिमान समाप्त हो गया और उन्होंने वर्षा रोक दी।
इसके बाद ब्रजवासी भगवान श्रीकृष्ण की महिमा से अभिभूत हो गए।
इस लीला से यह संदेश मिलता है कि अहंकार कितना भी बड़ा क्यों न हो, भगवान के सामने अंततः विनम्रता ही श्रेष्ठ है।
गोवर्धन पूजा हमें यह भी सिखाती है कि अन्न, गौ, प्रकृति और भूमि हमारे जीवन के आधार हैं और इनके प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता रखना आवश्यक है।
इसी पावन स्मृति में आज भी भक्तजन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन भगवान, गौ माता और अन्नकूट का पूजन करते हैं।
🌺 श्री गोवर्धन महाराज की जय।
🦚 जय श्रीकृष्ण।
🐄 जय गौ माता।
🙏 अंतिम प्रार्थना
हे भगवान श्रीकृष्ण!
हमारे जीवन से भय, अहंकार और नकारात्मकता दूर करें।
हमारे परिवार में आरोग्य, सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।
हमारे घर में अन्न की कभी कमी न हो।
गौ माता, प्रकृति और अन्न के प्रति हमारे मन में सदैव सम्मान और कृतज्ञता बनी रहे।
हमारे परिवार पर आपकी कृपा सदैव बनी रहे।
॥ जय श्रीकृष्ण ॥
॥ श्री गोवर्धन महाराज की जय ॥
॥ शुभ अन्नकूट ॥
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