🪔 दीपावली कब है? जानिए 8 नवंबर 2026 की अमावस्या तिथि, लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि और दीपावली की पावन कथा
🪔 दीपावली 2026 — तिथि और मुख्य पूजा मुहूर्त
📅 दीपावली — 8 नवंबर 2026, रविवार
🌙 अमावस्या तिथि प्रारंभ
8 नवंबर 2026 — प्रातः 11:28 बजे
🌙 अमावस्या तिथि समाप्त
9 नवंबर 2026 — दोपहर 12:32 बजे
🙏 लक्ष्मी-गणेश पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त
8 नवंबर 2026 — शाम 5:37 बजे से 7:34 बजे तक
🪔 दीपावली पूजा का दिन — 8 नवंबर 2026
🌟 विशेष महत्व: स्थिर लग्न में माता लक्ष्मी का पूजन विशेष रूप से शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि स्थिर लग्न को स्थायित्व और स्थिर समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
नोट: उपरोक्त तिथि और मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजा का समय काशी/वाराणसी की स्थानीय गणना के अनुसार है। दूसरे शहरों में स्थानीय सूर्यास्त और लग्न के अनुसार पूजा समय में कुछ अंतर हो सकता है।
🌺 दीपावली 2026 — प्रकाश, लक्ष्मी-पूजन और सुख-समृद्धि का महापर्व
दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह केवल दीप जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, असत्य पर सत्य और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की विजय का पावन अवसर है।
कार्तिक अमावस्या की रात्रि में घर-घर दीप प्रज्वलित किए जाते हैं और माता महालक्ष्मी, भगवान गणेश तथा अन्य देवशक्तियों का पूजन करके सुख, शांति, आरोग्य, धन-धान्य और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
इस लेख में दीपावली 2026 की तिथि, अमावस्या तिथि, लक्ष्मी-गणेश पूजन का मुख्य शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, संपूर्ण पूजन क्रम, प्रमुख देवताओं के सरल मंत्र, दीपदान, आरती, पुष्पांजलि, क्षमा प्रार्थना और अंत में दीपावली से जुड़ी पावन धार्मिक कथा विस्तार से दी गई है।
🌺 दीपावली के दिन किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?
दीपावली के मुख्य पूजन में माता महालक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन विशेष रूप से किया जाता है।
इसके साथ विस्तृत गृह-पूजन में—
🌺 माता महालक्ष्मी
🙏 भगवान श्रीगणेश
💰 भगवान कुबेर
📚 माता सरस्वती
का स्मरण और पूजन भी किया जाता है।
संपूर्ण गृह-पूजन को व्यवस्थित रूप देने के लिए क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है—
- संकल्प
- गौरी-गणेश पूजन
- कलश पूजन
- षोडश मातृका पूजन
- सप्तघृत मातृका पूजन
- नवग्रह पूजन
- माता महालक्ष्मी का प्रधान पूजन
- भगवान गणेश का पूजन
- भगवान कुबेर का पूजन
- माता सरस्वती का पूजन
- दीप पूजन एवं दीपदान
- नैवेद्य
- आरती
- पुष्पांजलि
- क्षमा प्रार्थना
🪔 दीपावली पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
पूजा की सामग्री अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार रखें।
मुख्य सामग्री—
- पूजा की चौकी
- स्वच्छ लाल या पीला वस्त्र
- माता लक्ष्मी का चित्र या विग्रह
- भगवान गणेश का चित्र या विग्रह
- भगवान कुबेर का चित्र या प्रतीक
- माता सरस्वती का चित्र या विग्रह
- कलश
- शुद्ध जल
- नारियल
- आम के पत्ते या उपलब्ध पत्ते
- रोली
- कुमकुम
- चंदन
- अक्षत
- पुष्प
- कमल पुष्प उपलब्ध हो तो
- धूप
- दीपक
- घी या तेल
- रुई की बत्ती
- दूध
- दही
- घी
- शहद
- शक्कर
- पंचामृत
- नैवेद्य
- फल
- मिठाई
- तांबूल
- दक्षिणा
- बही-खाता, यदि व्यापारिक पूजन हो
- दीपदान के लिए अतिरिक्त दीपक
यदि पूरी सामग्री उपलब्ध न हो तो चिंता न करें।
उपलब्ध सामग्री के अनुसार श्रद्धा, स्वच्छता और शुद्ध भावना से पूजा करें।
🙏 दीपावली की संपूर्ण पूजा विधि
सबसे पहले पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें।
घर में जहां लक्ष्मी-गणेश का पूजन करना है, वहां स्वच्छ चौकी रखें और उसके ऊपर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं।
पूजा सामग्री को व्यवस्थित करके रखें।
स्वयं स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद नीचे दिए गए क्रम से पूजा प्रारंभ करें।
1️⃣ संकल्प
दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान का स्मरण करें।
इसके बाद संकल्प का जल पृथ्वी पर छोड़ दें।
2️⃣ गौरी-गणेश पूजन
किसी भी शुभ पूजा का आरंभ भगवान गणेश के स्मरण से किया जाता है।
🌺 भगवान गणेश का ध्यान
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
मूल मंत्र—
इसके बाद भगवान गणेश को क्रमशः पूजन सामग्री अर्पित करें।
ॐ गं गणपतये नमः पाद्यं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः अर्घ्यं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः आचमनीयं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः सर्वाङ्गे स्नानीयं जलं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः पंचामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः वस्त्रं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः यज्ञोपवीतं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः चंदनं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः अक्षतान् समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः पुष्पाणि समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः धूपं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः दीपं समर्पयामि।
ॐ गं गणपतये नमः नैवेद्यं समर्पयामि।
इसके बाद भगवान गणेश की आरती करें।
🌸 माता गौरी का स्मरण
माता गौरी को कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
माता गौरी को यज्ञोपवीत अर्पित न करें।
3️⃣ कलश पूजन
कलश में शुद्ध जल भरें।
उसमें अक्षत और पुष्प डालें।
कलश पर आम के पत्ते या उपलब्ध पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें।
कलश को चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
मन में पवित्र तीर्थों और देवशक्तियों का स्मरण करें।
4️⃣ षोडश मातृका पूजन
विस्तृत गृह-पूजन में षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है।
मातृका-पूजन की नामावली विभिन्न परंपराओं में कुछ भिन्न मिल सकती है। यहां गृह-पूजन के लिए निर्धारित सरल क्रम दिया जा रहा है।
2. ॐ पद्मायै नमः।
3. ॐ शच्यै नमः।
4. ॐ मेधायै नमः।
5. ॐ सावित्र्यै नमः।
6. ॐ विजयायै नमः।
7. ॐ जयायै नमः।
8. ॐ देवसेनायै नमः।
9. ॐ स्वधायै नमः।
10. ॐ स्वाहायै नमः।
11. ॐ मातृभ्यः नमः।
12. ॐ लोकमातृभ्यः नमः।
13. ॐ धृत्यै नमः।
14. ॐ पुष्ट्यै नमः।
15. ॐ तुष्ट्यै नमः।
16. ॐ कुलदेवतायै नमः।
प्रत्येक मातृशक्ति को यथाशक्ति अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
5️⃣ सप्तघृत मातृका पूजन
विस्तृत गृह-पूजन पद्धति में सप्तघृत मातृकाओं का पूजन भी किया जाता है।
सात स्थान निर्धारित करके या उपलब्ध शुद्ध घृत से प्रतीक बनाकर मातृशक्तियों का पूजन किया जा सकता है।
प्रत्येक स्थान पर चंदन, अक्षत, पुष्प और दीप अर्पित करें।
परिवार के आरोग्य, पोषण, सुख और मंगल की प्रार्थना करें।
6️⃣ नवग्रह पूजन
🌙 चंद्र — ॐ सोमाय नमः।
🔴 मंगल — ॐ भौमाय नमः।
🟢 बुध — ॐ बुधाय नमः।
🟡 बृहस्पति — ॐ बृहस्पतये नमः।
⚪ शुक्र — ॐ शुक्राय नमः।
⚫ शनि — ॐ शनैश्चराय नमः।
☊ राहु — ॐ राहवे नमः।
☋ केतु — ॐ केतवे नमः।
सामूहिक मंत्र—
प्रत्येक ग्रह को यथाशक्ति अक्षत, पुष्प और जल अर्पित करें।
🌺 7️⃣ माता महालक्ष्मी का प्रधान पूजन
अब दीपावली पूजा के मुख्य आराध्य माता महालक्ष्मी का पूजन करें।
माता लक्ष्मी को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें।
मूल मंत्र—
इसके बाद माता लक्ष्मी को क्रम से पूजन सामग्री अर्पित करें।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पाद्यं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः अर्घ्यं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः आचमनीयं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः सर्वाङ्गे स्नानीयं जलं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पंचामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः वस्त्रं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः चंदनं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः कुमकुमं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः अक्षतान् समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पुष्पाणि समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः धूपं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः दीपं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः नैवेद्यं समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः फलानि समर्पयामि।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ताम्बूलं समर्पयामि।
माता महालक्ष्मी को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें।
माता लक्ष्मी को यज्ञोपवीत अर्पित न करें।
🙏 8️⃣ भगवान गणेश का दीपावली विशेष पूजन
दीपावली में माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश का पूजन विशेष रूप से किया जाता है।
भगवान गणेश को आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमनीय, स्नान, पंचामृत स्नान, शुद्धोदक स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
इसके बाद भगवान गणेश की आरती करें।
प्रार्थना करें—
“हे विघ्नहर्ता गणेश जी! हमारे जीवन से सभी विघ्न दूर करें और हमारे घर में शुभता, सद्बुद्धि, शांति और मंगल प्रदान करें।”
💰 9️⃣ भगवान कुबेर का पूजन
भगवान कुबेर को धन और समृद्धि के अधिष्ठाता देव के रूप में स्मरण किया जाता है।
पूजन क्रम—
ॐ कुबेराय नमः पाद्यं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः अर्घ्यं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः आचमनीयं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः स्नानीयं जलं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः पंचामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः वस्त्रं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः यज्ञोपवीतं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः चंदनं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः अक्षतान् समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः पुष्पाणि समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः धूपं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः दीपं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः नैवेद्यं समर्पयामि।
🌺 विशेष कुबेर मंत्र
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
📚 🔟 माता सरस्वती का पूजन
दीपावली केवल धन-संपत्ति की कामना का पर्व नहीं है। जीवन में सही ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि भी आवश्यक है।
इसी भाव से माता सरस्वती का स्मरण किया जा सकता है।
माता सरस्वती को आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमनीय, स्नानीय जल, पंचामृत स्नान, शुद्धोदक स्नान, वस्त्र, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
माता सरस्वती को यज्ञोपवीत अर्पित न करें।
प्रार्थना—
🪔 1️⃣1️⃣ दीप पूजन
अब दीपों का पूजन करें।
दीपक में घी या तेल डालकर बत्ती रखें।
दीप प्रज्वलित करें और मन में भगवान का स्मरण करें।
सरल प्रार्थना—
इसके बाद घर के मुख्य स्थानों, पूजा स्थान और आवश्यक सुरक्षित स्थानों पर दीप प्रज्वलित करें।
दीपक हमेशा सुरक्षित स्थान पर रखें और बच्चों से दूर रखें।
🍚 1️⃣2️⃣ नैवेद्य अर्पण
माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर और अन्य पूजित देवताओं को यथाशक्ति सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें।
फल, मिठाई, खीर या घर में उपलब्ध सात्त्विक भोजन नैवेद्य के रूप में अर्पित किया जा सकता है।
ॐ गं गणपतये नमः नैवेद्यं समर्पयामि।
ॐ कुबेराय नमः नैवेद्यं समर्पयामि।
कुछ समय भगवान को भोग अर्पित करने के बाद प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
🌺 1️⃣3️⃣ आरती
अब माता महालक्ष्मी, भगवान गणेश और अन्य पूजित देवताओं की आरती करें।
पूरे परिवार के सदस्य श्रद्धापूर्वक आरती में शामिल हों।
पूरी आरती पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट के “आरती संग्रह” सेक्शन में जरूर देखें। वहां आपको माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और अन्य सभी देवी-देवताओं की आरतियां एक ही स्थान पर मिल जाएंगी।
आरती के बाद सभी देवताओं को प्रणाम करें।
🌸 1️⃣4️⃣ पुष्पांजलि
दोनों हाथों में पुष्प और अक्षत लेकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के चरणों में अर्पित करें।
🙏 1️⃣5️⃣ क्षमा प्रार्थना
पूजा में किसी भी प्रकार की कमी रह गई हो तो अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
हे प्रभु! पूजा में मंत्र, विधि या भावना से कोई कमी रह गई हो तो कृपा करके उसे पूर्ण स्वीकार करें।
🌺 दीपावली पर क्या करें?
✅ घर और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
✅ माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का श्रद्धापूर्वक पूजन करें।
✅ 8 नवंबर 2026 की शाम मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजा करें।
✅ घर में दीप प्रज्वलित करें।
✅ यथाशक्ति दान-पुण्य करें।
✅ जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें।
✅ परिवार के सुख, शांति और आरोग्य के लिए प्रार्थना करें।
✅ घर में सकारात्मक, शांत और धार्मिक वातावरण बनाए रखें।
❌ दीपावली पर क्या न करें?
❌ पूजा केवल दिखावे के लिए न करें।
❌ क्रोध और विवाद से बचें।
❌ किसी का अपमान न करें।
❌ नशे और अनैतिक कार्यों से दूर रहें।
❌ दीपक को असुरक्षित स्थान पर न रखें।
❌ केवल धन की प्राप्ति को ही जीवन का उद्देश्य न मानें।
दीपावली का वास्तविक संदेश है—धन के साथ धर्म, ज्ञान, सद्बुद्धि, सेवा और सदाचार का प्रकाश भी जीवन में आए।
📖 अब जानिए दीपावली के पीछे की पावन धार्मिक कथा
दीपावली से अनेक धार्मिक परंपराएँ जुड़ी हुई हैं। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व से संबंधित कथाओं और मान्यताओं में भिन्नता मिलती है।
इनमें भगवान श्रीराम का अयोध्या लौटना, माता लक्ष्मी का समुद्र मंथन से प्राकट्य तथा भगवान विष्णु और लक्ष्मी से संबंधित धार्मिक परंपराएँ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
🌺 भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की परंपरा
भगवान श्रीराम ने धर्म की स्थापना करते हुए रावण का वध किया और चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे।
रामायण परंपरा में भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन का प्रसंग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बाद की धार्मिक लोकपरंपराओं में श्रीराम के अयोध्या आगमन को दीपावली के दीपोत्सव से विशेष रूप से जोड़ा गया।
मान्यता है कि भगवान श्रीराम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने अपने घरों और मार्गों को दीपों से प्रकाशित किया।
इसी भाव से दीपावली आज भी प्रकाश और धर्म की विजय का प्रतीक मानी जाती है।
🌊 समुद्र मंथन और माता लक्ष्मी का प्राकट्य
दीपावली पर माता महालक्ष्मी के पूजन का संबंध समुद्र मंथन की पौराणिक परंपरा से भी जोड़ा जाता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध में समुद्र मंथन का विस्तृत वर्णन मिलता है।
देवताओं और असुरों ने क्षीरसागर का मंथन किया।
समुद्र मंथन से अनेक दिव्य वस्तुएँ और देवशक्तियाँ प्रकट हुईं।
इसी प्रसंग में माता लक्ष्मी के प्राकट्य का वर्णन मिलता है।
देवताओं और ऋषियों ने माता लक्ष्मी की स्तुति की।
माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया।
इस कारण माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति और श्रीस्वरूप के रूप में पूजा जाता है।
दीपावली की रात्रि में माता लक्ष्मी का पूजन इसी समृद्धि, मंगल, सौभाग्य और दिव्य श्री की भावना से किया जाता है।
🌟 दीपावली का वास्तविक आध्यात्मिक संदेश
दीपावली हमें केवल अपने घर को रोशन करने का संदेश नहीं देती।
यह हमें अपने भीतर भी प्रकाश उत्पन्न करने की प्रेरणा देती है।
हमारे भीतर का—
क्रोध,
लोभ,
मोह,
अहंकार,
ईर्ष्या,
अज्ञान
भी एक प्रकार का अंधकार है।
जब हम इन दोषों को कम करके सत्य, धर्म, प्रेम, सेवा, ज्ञान और सदाचार की ओर बढ़ते हैं, तभी दीपावली का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।
माता लक्ष्मी से धन की कामना के साथ हमें यह भी प्रार्थना करनी चाहिए कि धन का उपयोग धर्म, सेवा और परिवार के कल्याण के लिए हो।
भगवान गणेश से धन के साथ विवेक और सद्बुद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए।
माता सरस्वती से ज्ञान और सही निर्णय लेने की शक्ति मांगनी चाहिए।
और भगवान कुबेर का स्मरण करते हुए अर्जित धन का उचित और धर्मसम्मत उपयोग करने का संकल्प लेना चाहिए।
🕉️ शास्त्रीय एवं धार्मिक आधार
दीपावली से जुड़ी विभिन्न धार्मिक परंपराओं के आधार अलग-अलग ग्रंथों और लोकपरंपराओं में मिलते हैं।
📖 श्रीमद्भागवत महापुराण — अष्टम स्कंध में समुद्र मंथन एवं माता लक्ष्मी के प्राकट्य का वर्णन मिलता है।
📖 रामायण परंपरा में भगवान श्रीराम के वनवास पूर्ण करके अयोध्या लौटने का पावन प्रसंग मिलता है।
इन धार्मिक प्रसंगों के आधार पर दीपावली को प्रकाश, धर्म, श्री, मंगल और विजय का पर्व माना जाता है।
🌺 अंतिम प्रार्थना
हे माता महालक्ष्मी!
हमारे घर में केवल धन नहीं, बल्कि धर्म, शांति, प्रेम, आरोग्य और संतोष भी प्रदान करें।
हे भगवान गणेश!
हमारे जीवन के सभी विघ्न दूर करें और हमें सद्बुद्धि प्रदान करें।
हे माता सरस्वती!
हमें ज्ञान, विवेक और सही मार्ग पर चलने की शक्ति दें।
हे भगवान कुबेर!
हमें धर्मसम्मत साधनों से प्राप्त धन का सदुपयोग करने की बुद्धि दें।
हमारे घर में सदैव प्रकाश, सुख, शांति और मंगल बना रहे।
॥ श्री महालक्ष्म्यै नमः ॥
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ शुभ दीपावली ॥
॥ श्रीमहालक्ष्मी-गणेशार्पणमस्तु ॥










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