🪔 2026 का धनतेरस कब है? जानिए तारीख, त्रयोदशी तिथि, पूजा विधि, धन्वंतरि भगवान की कथा, क्या खरीदें और शुभ मुहूर्त
📅 तिथि: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
⏰ त्रयोदशी तिथि: 6 नवंबर को प्रातः लगभग 10:31 बजे से 7 नवंबर को प्रातः लगभग 10:48 बजे तक।
🌆 धनतेरस पूजा: सामान्यतः प्रदोष काल में शाम के समय पूजा करना शुभ माना जाता है।
धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दीपावली पर्व की शुरुआत का महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। साथ ही परिवार की सुख-समृद्धि और अकाल मृत्यु से रक्षा की भावना से यम दीपदान भी किया जाता है।
2026 में धनतेरस का पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाया जाएगा।
🌺 धनतेरस के दिन किनकी पूजा की जाती है?
धनतेरस के दिन मुख्य रूप से भगवान धन्वंतरि, माता महालक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। भगवान धन्वंतरि को आरोग्य और आयुर्वेद का देवता माना जाता है, माता लक्ष्मी धन-धान्य एवं समृद्धि की देवी हैं और भगवान कुबेर धन के अधिपति माने जाते हैं।
इस दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है।
🛍️ धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, पीतल, तांबा, स्टील या अन्य उपयोगी वस्तु खरीदने की परंपरा है। बर्तन, पूजा सामग्री और घर की उपयोगी वस्तुएँ भी खरीदी जाती हैं।
धनतेरस का वास्तविक संदेश केवल खरीदारी नहीं है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार, बिना किसी दबाव के उपयोगी वस्तु खरीदना ही पर्याप्त है।
🌸 धनतेरस पूजा सामग्री
- गणेश जी और गौरी माता की प्रतिमा/चित्र
- कलश, जल, पत्ते और नारियल
- रोली, कुमकुम, चंदन और अक्षत
- पुष्प एवं माला
- धूप और दीपक
- पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर
- वस्त्र
- नैवेद्य, फल और मिठाई
- इत्र/सुगंधित द्रव्य, यदि उपलब्ध हो
- सुपारी, पान आदि, यदि उपलब्ध हो
- यम दीपदान के लिए दीपक
यदि किसी परिवार के पास पूरी पूजा सामग्री उपलब्ध नहीं है तो चिंता न करें। उपलब्ध सामग्री के अनुसार श्रद्धा और भक्ति से पूजा करें। भगवान के लिए सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा है, सामग्री की अधिकता नहीं।
🕉️ धनतेरस की संपूर्ण पूजा विधि — क्रमबद्ध विधान
नीचे पूजा-विधि को इस प्रकार रखा गया है कि सामान्य परिवार भी आसानी से कर सके। प्रत्येक उपचार में देवता के नाम के साथ सरल मंत्र और उसके बाद समर्पण का संस्कृत वाक्य दिया गया है।
संकल्प → गौरी-गणेश → कलश → षोडश मातृका → सप्तघृत मातृका → नवग्रह → भगवान धन्वंतरि → माता लक्ष्मी → भगवान कुबेर → यम दीपदान → आरती → पुष्पांजलि → क्षमा प्रार्थना
🌺 1️⃣ गौरी-गणेश पूजन
🕉️ गणेश जी का ध्यान
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
ध्यान: ॐ गं गणपतये नमः ध्यायामि।
आवाहन: ॐ गं गणपतये नमः आवाहयामि।
आसन: ॐ गं गणपतये नमः आसनं समर्पयामि।
पाद्य: ॐ गं गणपतये नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि।
अर्घ्य: ॐ गं गणपतये नमः हस्तयोः अर्घ्यं समर्पयामि।
आचमनीय: ॐ गं गणपतये नमः मुखे आचमनीयं समर्पयामि।
स्नान: ॐ गं गणपतये नमः सर्वाङ्गे स्नानीयं जलं समर्पयामि।
पंचामृत स्नान: ॐ गं गणपतये नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि।
शुद्धोदक स्नान: ॐ गं गणपतये नमः पंचामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
वस्त्र: ॐ गं गणपतये नमः वस्त्रं समर्पयामि।
चंदन: ॐ गं गणपतये नमः चंदनं समर्पयामि।
अक्षत: ॐ गं गणपतये नमः अक्षतान् समर्पयामि।
पुष्प: ॐ गं गणपतये नमः पुष्पं समर्पयामि।
दूर्वा: ॐ गं गणपतये नमः दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि।
धूप: ॐ गं गणपतये नमः धूपं समर्पयामि।
दीप: ॐ गं गणपतये नमः दीपं दर्शयामि।
नैवेद्य: ॐ गं गणपतये नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
फल: ॐ गं गणपतये नमः फलं समर्पयामि।
आरती: ॐ गं गणपतये नमः आरार्तिक्यं समर्पयामि।
पुष्पांजलि: ॐ गं गणपतये नमः पुष्पांजलिं समर्पयामि।
🌺 गौरी माता पूजन
ध्यान: ॐ गौर्यै नमः ध्यायामि।
आवाहन: ॐ गौर्यै नमः आवाहयामि।
आसन: ॐ गौर्यै नमः आसनं समर्पयामि।
पाद्य: ॐ गौर्यै नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि।
अर्घ्य: ॐ गौर्यै नमः हस्तयोः अर्घ्यं समर्पयामि।
आचमनीय: ॐ गौर्यै नमः मुखे आचमनीयं समर्पयामि।
स्नान: ॐ गौर्यै नमः सर्वाङ्गे स्नानीयं जलं समर्पयामि।
पंचामृत स्नान: ॐ गौर्यै नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि।
शुद्धोदक स्नान: ॐ गौर्यै नमः पंचामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
वस्त्र: ॐ गौर्यै नमः वस्त्रं समर्पयामि।
चंदन: ॐ गौर्यै नमः चंदनं समर्पयामि।
कुमकुम: ॐ गौर्यै नमः कुमकुमं समर्पयामि।
अक्षत: ॐ गौर्यै नमः अक्षतान् समर्पयामि।
पुष्प: ॐ गौर्यै नमः पुष्पं समर्पयामि।
धूप: ॐ गौर्यै नमः धूपं समर्पयामि।
दीप: ॐ गौर्यै नमः दीपं दर्शयामि।
नैवेद्य: ॐ गौर्यै नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
फल: ॐ गौर्यै नमः फलं समर्पयामि।
आरती: ॐ गौर्यै नमः आरार्तिक्यं समर्पयामि।
पुष्पांजलि: ॐ गौर्यै नमः पुष्पांजलिं समर्पयामि।
🪔 2️⃣ कलश स्थापना एवं पूजन
कलश में जल भरकर उसमें अक्षत, पुष्प आदि डालें। ऊपर पत्ते और नारियल रखें।
ध्यान: ॐ कलशाय नमः ध्यायामि।
आवाहन: ॐ कलशाय नमः आवाहयामि।
आसन: ॐ कलशाय नमः आसनं समर्पयामि।
गंध: ॐ कलशाय नमः चंदनं समर्पयामि।
अक्षत: ॐ कलशाय नमः अक्षतान् समर्पयामि।
पुष्प: ॐ कलशाय नमः पुष्पं समर्पयामि।
धूप: ॐ कलशाय नमः धूपं समर्पयामि।
दीप: ॐ कलशाय नमः दीपं दर्शयामि।
नैवेद्य: ॐ कलशाय नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
🌸 3️⃣ षोडश मातृका पूजन
षोडश मातृकाओं का पूजन परंपरा के अनुसार क्रम से किया जा सकता है। प्रत्येक देवी को चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
ॐ गौर्यै नमः।
ॐ पद्मायै नमः।
ॐ शच्यै नमः।
ॐ मेधायै नमः।
ॐ सावित्र्यै नमः।
ॐ विजयायै नमः।
ॐ जयायै नमः।
ॐ देवसेनायै नमः।
ॐ स्वधायै नमः।
ॐ स्वाहायै नमः।
ॐ मातृभ्यः नमः।
ॐ लोकमातृभ्यः नमः।
ॐ धृत्यै नमः।
ॐ पुष्ट्यै नमः।
ॐ तुष्ट्यै नमः।
ॐ कुलदेवतायै नमः।
चंदनाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।
🌟 4️⃣ सप्तघृत मातृका पूजन
सप्तघृत मातृकाओं का पूजन घृत या उपलब्ध सामग्री से श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।
सर्वोपचारान् समर्पयामि।
☀️ 5️⃣ नवग्रह पूजन
प्रत्येक ग्रह को चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ सोमाय नमः।
ॐ भौमाय नमः।
ॐ बुधाय नमः।
ॐ बृहस्पतये नमः।
ॐ शुक्राय नमः।
ॐ शनैश्चराय नमः।
ॐ राहवे नमः।
ॐ केतवे नमः।
सर्वोपचारान् समर्पयामि।
🩺 6️⃣ भगवान धन्वंतरि का विस्तृत पूजन
अब भगवान धन्वंतरि का पूजन करें। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा विशेष रूप से आरोग्य और दीर्घायु की भावना से की जाती है।
सर्वामयविनाशनाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥
सरल मंत्र: ॐ धन्वंतरये नमः।
ध्यान: ॐ धन्वंतरये नमः ध्यायामि।
आवाहन: ॐ धन्वंतरये नमः आवाहयामि।
आसन: ॐ धन्वंतरये नमः आसनं समर्पयामि।
पाद्य: ॐ धन्वंतरये नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि।
अर्घ्य: ॐ धन्वंतरये नमः हस्तयोः अर्घ्यं समर्पयामि।
आचमनीय: ॐ धन्वंतरये नमः मुखे आचमनीयं समर्पयामि।
स्नान: ॐ धन्वंतरये नमः सर्वाङ्गे स्नानीयं जलं समर्पयामि।
पंचामृत स्नान: ॐ धन्वंतरये नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि।
शुद्धोदक स्नान: ॐ धन्वंतरये नमः पंचामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
वस्त्र: ॐ धन्वंतरये नमः वस्त्रं समर्पयामि।
यज्ञोपवीत: ॐ धन्वंतरये नमः यज्ञोपवीतं समर्पयामि।
चंदन: ॐ धन्वंतरये नमः चंदनं समर्पयामि।
अक्षत: ॐ धन्वंतरये नमः अक्षतान् समर्पयामि।
पुष्प: ॐ धन्वंतरये नमः पुष्पं समर्पयामि।
धूप: ॐ धन्वंतरये नमः धूपं समर्पयामि।
दीप: ॐ धन्वंतरये नमः दीपं दर्शयामि।
नैवेद्य: ॐ धन्वंतरये नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
फल: ॐ धन्वंतरये नमः फलं समर्पयामि।
आरती: ॐ धन्वंतरये नमः आरार्तिक्यं समर्पयामि।
पुष्पांजलि: ॐ धन्वंतरये नमः पुष्पांजलिं समर्पयामि।
💰 7️⃣ माता महालक्ष्मी का विस्तृत पूजन
मंत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
ध्यान: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ध्यायामि।
आवाहन: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः आवाहयामि।
आसन: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः आसनं समर्पयामि।
पाद्य: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि।
अर्घ्य: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः हस्तयोः अर्घ्यं समर्पयामि।
आचमनीय: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मुखे आचमनीयं समर्पयामि।
स्नान: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः सर्वाङ्गे स्नानीयं जलं समर्पयामि।
पंचामृत स्नान: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि।
शुद्धोदक स्नान: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पंचामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
वस्त्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः वस्त्रं समर्पयामि।
चंदन: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः चंदनं समर्पयामि।
कुमकुम: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः कुमकुमं समर्पयामि।
अक्षत: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः अक्षतान् समर्पयामि।
पुष्प: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पुष्पं समर्पयामि।
इत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः सुगन्धितं द्रव्यं समर्पयामि।
धूप: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः धूपं समर्पयामि।
दीप: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः दीपं दर्शयामि।
नैवेद्य: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
फल: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः फलं समर्पयामि।
तांबूल: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ताम्बूलं समर्पयामि।
आरती: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः आरार्तिक्यं समर्पयामि।
पुष्पांजलि: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः पुष्पांजलिं समर्पयामि।
🪙 8️⃣ भगवान कुबेर का विस्तृत पूजन
सरल मंत्र: ॐ कुबेराय नमः।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
ध्यान: ॐ कुबेराय नमः ध्यायामि।
आवाहन: ॐ कुबेराय नमः आवाहयामि।
आसन: ॐ कुबेराय नमः आसनं समर्पयामि।
पाद्य: ॐ कुबेराय नमः पादयोः पाद्यं समर्पयामि।
अर्घ्य: ॐ कुबेराय नमः हस्तयोः अर्घ्यं समर्पयामि।
आचमनीय: ॐ कुबेराय नमः मुखे आचमनीयं समर्पयामि।
स्नान: ॐ कुबेराय नमः सर्वाङ्गे स्नानीयं जलं समर्पयामि।
पंचामृत स्नान: ॐ कुबेराय नमः पंचामृतस्नानं समर्पयामि।
शुद्धोदक स्नान: ॐ कुबेराय नमः पंचामृतस्नानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि।
वस्त्र: ॐ कुबेराय नमः वस्त्रं समर्पयामि।
यज्ञोपवीत: ॐ कुबेराय नमः यज्ञोपवीतं समर्पयामि।
चंदन: ॐ कुबेराय नमः चंदनं समर्पयामि।
अक्षत: ॐ कुबेराय नमः अक्षतान् समर्पयामि।
पुष्प: ॐ कुबेराय नमः पुष्पं समर्पयामि।
धूप: ॐ कुबेराय नमः धूपं समर्पयामि।
दीप: ॐ कुबेराय नमः दीपं दर्शयामि।
नैवेद्य: ॐ कुबेराय नमः नैवेद्यं निवेदयामि।
फल: ॐ कुबेराय नमः फलं समर्पयामि।
आरती: ॐ कुबेराय नमः आरार्तिक्यं समर्पयामि।
पुष्पांजलि: ॐ कुबेराय नमः पुष्पांजलिं समर्पयामि।
🪔 9️⃣ यम दीपदान
धनतेरस की संध्या यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। घर के मुख्य द्वार के बाहर एक दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक यमराज का स्मरण करें।
ॐ यमाय नमः दीपं समर्पयामि।
इसके बाद मन में प्रार्थना करें कि परिवार के सभी सदस्यों को आरोग्य, दीर्घायु और मंगल प्राप्त हो तथा अकाल मृत्यु से रक्षा हो।
🪔 1️⃣0️⃣ दीप आरती
सभी देवी-देवताओं के समक्ष दीप जलाकर आरती करें। परिवार के सभी सदस्य श्रद्धा से आरती में शामिल हो सकते हैं।
आरती के समय अपने घर, परिवार और समाज के कल्याण की भावना रखें।
🙏 1️⃣1️⃣ पुष्पांजलि और क्षमा प्रार्थना
अंत में हाथ में पुष्प और अक्षत लेकर सभी देवी-देवताओं को समर्पित करें।
सर्वोपचारान् समर्पयामि।
पुष्पांजलिं समर्पयामि।
क्षमा प्रार्थना:
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
हे भगवान! पूजा करते समय मंत्र, विधि या सामग्री में जो भी कमी या त्रुटि हुई हो, उसे क्षमा करें और मेरी श्रद्धा को स्वीकार करके इस पूजा को पूर्णता प्रदान करें।
🌊 धनतेरस के पीछे भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य की पावन कथा
धनतेरस का संबंध केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि आरोग्य और जीवन की रक्षा से भी है। इसका सुंदर आधार श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित समुद्र मंथन की कथा में मिलता है।
जब देवताओं और असुरों ने अमृत की प्राप्ति के लिए क्षीरसागर का मंथन किया, तब अनेक दिव्य वस्तुएँ और शक्तियाँ प्रकट हुईं। इसी समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए। उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था।
श्रीमद्भागवत महापुराण के अष्टम स्कंध में भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य का वर्णन मिलता है।
भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हमें यह संदेश देता है कि संसार में सबसे बड़ा धन केवल सोना-चांदी नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, लंबी आयु और निरोगी जीवन है।
इसीलिए धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि का स्मरण करके आरोग्य की कामना करना विशेष महत्व रखता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण, अष्टम स्कंध, समुद्र मंथन एवं भगवान धन्वंतरि प्राकट्य प्रसंग।
🌺 धनतेरस पूजा का सबसे सरल संदेश
धनतेरस की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा, स्वच्छता, सात्त्विक भावना और सामर्थ्य के अनुसार पूजा। यदि सभी सामग्री उपलब्ध न हो तो उपलब्ध सामग्री से ही भगवान का स्मरण करें।
महंगे सामान की आवश्यकता नहीं है। एक दीपक, थोड़ा जल, अक्षत, पुष्प और सच्ची श्रद्धा से भी भगवान की पूजा की जा सकती है।
🪔 धनतेरस का संदेश: स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है, संतोष सबसे बड़ी संपत्ति है और श्रद्धा सबसे बड़ी पूजा है।










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