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ऑनलाइन पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान

ONLINE PUJA • VIDEO CALL • PERSONAL SCHEDULE

घर बैठे विधिपूर्वक ऑनलाइन पूजा

भारत तथा विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित समय पर व्यक्तिगत रूप से वीडियो कॉल के माध्यम से ऑनलाइन पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान की सुविधा।

01 • संपर्कपहले WhatsApp/फोन पर पूजा की आवश्यकता और समय पर चर्चा करें।
02 • सामग्रीपूजा से पहले आवश्यक सामग्री की सूची और तैयारी की जानकारी दी जाएगी।
03 • मार्गदर्शनअपनी शंकाएँ पूछें और पूजा की विधि एवं तैयारी को समझें।
04 • Video Callनिर्धारित समय पर व्यक्तिगत वीडियो कॉल के माध्यम से पूजन कराया जाएगा।
श्री दुर्गा पूजा
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पूजन से पहले ऑनलाइन पूजा संबंधी प्रारंभिक जानकारी एवं मार्गदर्शन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। पहले जानकारी लें, अपनी शंकाएँ दूर करें और पूरी तरह संतुष्ट होकर ही पूजा निर्धारित करें।

आपका पूजन व्यक्तिगत रूप से निर्धारित समय पर कराया जाएगा।
पूजा को किसी सामूहिक ऑनलाइन सत्र के रूप में नहीं कराया जाएगा। आपका निर्धारित समय विशेष रूप से आपके पूजन के लिए रखा जाएगा और पूजा वीडियो कॉल के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से संपन्न कराई जाएगी।भारत • अमेरिका • दुबई • लंदन • कनाडा • सिंगापुर • इंडोनेशिया (बाली) एवं अन्य स्थानों से संपर्क किया जा सकता है।
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एवं सभी प्रकार के ऑनलाइन पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराते हैं।

आध्यात्मिक सेवाएं

तांत्रिक एवं वैदिक अनुष्ठान

प्रमुख आध्यात्मिक परंपराओं और विधिपूर्वक किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित जानकारी एवं मार्गदर्शन।

माँ बगलामुखी
TANTRA • UPASANA

श्री बगलामुखी देवी जी का तांत्रिक अनुष्ठान

श्री बगलामुखी देवी का तांत्रिक अनुष्ठान कार्यसिद्धि, जीवन में आने वाली बाधाओं के निवारण तथा कठिन परिस्थितियों में आध्यात्मिक संबल और मार्गदर्शन की भावना से विधिपूर्वक किया जाता है। मंत्र-जप, पूजन एवं अनुष्ठान की परंपराओं में देवी की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है।

बटुक भैरव
TANTRA • BHAIRAVA UPASANA

श्री बटुक भैरव जी का तांत्रिक अनुष्ठान

बटुक भैरव भगवान की उपासना परंपरा में संरक्षण, बाधा-निवारण, आध्यात्मिक शक्ति तथा जीवन में स्थिरता की कामना से विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। मंत्र-जप, पूजन एवं विधिपूर्वक साधना के माध्यम से भगवान बटुक भैरव की कृपा प्राप्ति की भावना रखी जाती है।

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श्री दुर्गा सप्तशती एवं चंडी अनुष्ठान

श्री दुर्गा सप्तशती की परंपरा में देवी उपासना, शक्ति-आराधना और मंगलकामना के लिए विधिपूर्वक पाठ एवं यज्ञीय अनुष्ठान किए जाते हैं। शतचंडी यज्ञ और सहस्रचंडी यज्ञ इसी परंपरा के प्रमुख अनुष्ठानिक रूपों में प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

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भगवान शिव, माता पार्वती और शिव परिवार की उपासना में रुद्राभिषेक, मंत्र-जप, पूजन तथा अन्य वैदिक धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष स्थान माना जाता है। श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिक कल्याण की भावना से विधिपूर्वक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।

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Saturday, 17 October 2026

17 अक्टूबर 2026 माँ कालरात्रि पूजा विधि: मंत्र, ध्यान, भोग, कथा और आरती | नवरात्रि सप्तमी

17 अक्टूबर 2026: माँ कालरात्रि पूजा विधि | मंत्र, ध्यान, भोग और कथा
🌺🔱 ॥ जय माता दी ॥ 🔱🌺

🌸 17 अक्टूबर 2026: माँ कालरात्रि पूजा विधि

🌺 नवरात्रि का सप्तम दिवस — माँ कालरात्रि की पूजा, मंत्र, ध्यान, भोग और कथा 🌺
🔱 ॥ ॐ देवी कालरात्र्यै नमः ॥ 🔱

शारदीय नवरात्रि के सप्तम दिन माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। 17 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि का सप्तम दिवस है और इस दिन माँ कालरात्रि की आराधना की जाएगी। �

Drikpanchang

माँ कालरात्रि का स्वरूप उग्र दिखाई देता है, लेकिन भक्तों के लिए माता को शुभंकरी अर्थात् शुभ फल देने वाली देवी माना जाता है। उनका स्मरण भय को दूर करने, साहस बढ़ाने और मन को मजबूत बनाने की भावना से किया जाता है।

नीचे माँ कालरात्रि की पूजा बहुत सरल क्रम में दी गई है। यदि आपको संस्कृत नहीं आती या आपने कभी पूरी पूजा नहीं की है, तब भी आप इसे देखकर अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

🌺 1. माँ कालरात्रि का स्वरूप

माँ कालरात्रि नवदुर्गा का सातवाँ स्वरूप हैं।

माता का वर्ण श्याम बताया गया है। उनके केश खुले हुए हैं और उनका वाहन गर्दभ अर्थात् गधा है। माता के चार हाथ बताए जाते हैं। उनके दो हाथों में शस्त्र तथा दो हाथों में अभय और वरद मुद्रा का वर्णन मिलता है। �

Drikpanchang

माँ का यह उग्र स्वरूप बुराई, भय और अंधकार पर शक्ति की विजय का प्रतीक माना जाता है।

इसी कारण माँ कालरात्रि का नाम सुनकर भयभीत होने के बजाय भक्त को उनके मंगलकारी स्वरूप का स्मरण करना चाहिए।

माता से प्रार्थना करें—

“हे माँ कालरात्रि! हमारे मन से भय दूर करें और हमें सत्य तथा धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति दें।”

🕉️ 2. माँ कालरात्रि का मुख्य मंत्र

🔱
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

सरल अर्थ

हे माँ कालरात्रि! आपको श्रद्धापूर्वक प्रणाम है।

इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार कर सकते हैं। �

Drikpanchang

🌸 3. पूजा की सरल सामग्री

माँ की पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं है।

घर में उपलब्ध सामग्री से श्रद्धापूर्वक पूजा करें।

  • 🌺 माँ कालरात्रि की तस्वीर या प्रतिमा
  • 🪔 दीपक, घी या तेल और बत्ती
  • 💧 स्वच्छ जल
  • 🌹 रोली
  • 🌾 अक्षत
  • 🌸 पुष्प
  • 🌿 धूप या अगरबत्ती
  • 🍯 गुड़
  • 🍎 फल
  • 🥛 दूध या खीर
  • 🍚 सात्त्विक प्रसाद
  • 🌺 पूजा की थाली

माँ कालरात्रि के लिए रात की रानी के पुष्प का उल्लेख मिलता है और गुड़ का भोग भी नवरात्रि की परंपरा में बताया जाता है। �

Drikpanchang

लेकिन यदि इनमें से कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है तो पूजा रोकने की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है।

🙏 4. माँ कालरात्रि की पूजा विधि — बिल्कुल सरल क्रम में

अब पूजा का पूरा क्रम शुरू करें।

🌺 चरण 1 — स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें

सबसे पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

पूजा स्थान को साफ करें और माँ कालरात्रि की तस्वीर या प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें।

हाथ जोड़कर कहें—

“हे माँ कालरात्रि! मैं श्रद्धापूर्वक आपकी पूजा करने जा रहा/रही हूँ। मेरी पूजा स्वीकार करें और मेरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।”

💧 चरण 2 — शुद्धिकरण करें

एक छोटे पात्र में स्वच्छ जल लें।

जल को अपने ऊपर और पूजा स्थान के आसपास हल्के से छिड़कें।

तीन बार बोलें—

ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु।

इसके बाद माता को प्रणाम करें।

💧 चरण 3 — आचमन करें

थोड़ा-थोड़ा जल लेकर तीन बार बोलें—

ॐ केशवाय नमः॥
ॐ नारायणाय नमः॥
ॐ माधवाय नमः॥

इसके बाद हाथ धो लें।

🪔 चरण 4 — दीपक और धूप जलाएँ

अब माता के सामने दीपक जलाएँ और धूप या अगरबत्ती प्रज्वलित करें।

दीपक के सामने हाथ जोड़कर कहें—

“हे माँ! मेरे घर और मेरे मन में प्रकाश बनाए रखें तथा भय और अंधकार को दूर करें।”

फिर माता को प्रणाम करें।

🙏 चरण 5 — भगवान गणेश का स्मरण करें

पूजा निर्विघ्न पूरी हो, इसके लिए पहले भगवान गणेश का स्मरण करें।

ॐ गं गणपतये नमः॥
फिर कहें—

“हे गणपति महाराज! मेरी पूजा बिना किसी विघ्न के पूर्ण कराएँ।”

🌺 चरण 6 — माँ कालरात्रि का ध्यान करें

अब कुछ क्षण शांत होकर माता के स्वरूप को मन में याद करें।

माता के चरणों में अपना मन लगाएँ और बोलें—

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

इसके बाद माता का ध्यान करें।

🌺 5. माँ कालरात्रि का ध्यान

माता के सामने बैठकर शांत मन से यह प्रार्थना पढ़ें—

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥

वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

Drikpanchang

इसके बाद कुछ क्षण आँखें बंद करके माँ के स्वरूप का ध्यान करें।

सरल भाव:

हे माँ कालरात्रि! आप अपने भक्तों के भय को दूर करने वाली हैं। हमें साहस दें, हमारे मन को मजबूत करें और हमें बुरे विचारों से दूर रखें।

🌹 6. माता को रोली और अक्षत अर्पित करें

अब माँ को रोली और अक्षत अर्पित करें।

अर्पित करते समय बोलें—

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

फिर माता को प्रणाम करें।

🌸 7. माता को पुष्प अर्पित करें

माता को श्रद्धापूर्वक पुष्प चढ़ाएँ।

यदि रात की रानी का पुष्प उपलब्ध हो तो अर्पित कर सकते हैं।

पुष्प अर्पित करते समय बोलें—

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

🕉️ 8. माँ का मुख्य मंत्र जाप करें

अब माता के मुख्य मंत्र का जाप करें—

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

इसे 11, 21 या 108 बार अपनी सुविधा के अनुसार बोलें।

मंत्र बोलते समय मन को शांत रखें और माता के चरणों का ध्यान करें।

🌺 9. माँ कालरात्रि की प्रार्थना करें

अब हाथ जोड़कर माता से अपनी भाषा में भी प्रार्थना कर सकते हैं।

कहें—

“हे माँ कालरात्रि! मेरे घर से भय और अशांति को दूर करें। मेरे परिवार की रक्षा करें। हमें साहस, सद्बुद्धि और सही रास्ते पर चलने की शक्ति दें।”

फिर माता का स्मरण करते हुए कहें—

या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

🍯 10. माँ कालरात्रि को भोग लगाएँ

अब माता को सात्त्विक भोग अर्पित करें।

गुड़ का भोग श्रद्धा से अर्पित किया जा सकता है। �

Drikpanchang

इसके साथ अपनी सुविधा के अनुसार—

  • 🍯 गुड़
  • 🍎 फल
  • 🥛 दूध
  • 🍚 खीर
  • 🍚 घर का सात्त्विक प्रसाद
भोग लगाते समय कहें—

“हे माँ कालरात्रि! श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया यह भोग स्वीकार करें और हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।”

कुछ समय बाद प्रसाद परिवार में बाँट दें।

🪔 11. माँ की आरती करें

अब दीपक लेकर माता की आरती करें।

आप अपने घर में जिस आरती की परंपरा से माँ की आरती करते हैं, वही आरती कर सकते हैं।

आरती पूरी होने के बाद माता को प्रणाम करें और परिवार के सभी सदस्यों को आरती दिखाएँ।

🙏 12. पूजा के अंत में प्रार्थना

हाथ जोड़कर कहें—

हे माँ कालरात्रि!
हमारे घर में सुख और शांति बनाए रखें।
हमारे परिवार को सुरक्षित रखें।
हमारे बच्चों को अच्छे संस्कार दें।
हमारे माता-पिता पर अपनी कृपा बनाए रखें।
हमारे मन से भय, चिंता और नकारात्मक विचारों को दूर करें।
हमें कठिन समय में धैर्य और साहस दें।
हमें सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की शक्ति दें।

🌺 सभी का मंगल हो।

🌺 सभी का कल्याण हो।

🌺 सभी के जीवन में सुख और शांति हो।

🔱 ॥ जय माँ कालरात्रि ॥ 🔱
🌺 ॥ जय माता दी ॥ 🌺

📖 13. माँ कालरात्रि की पावन कथा

माँ कालरात्रि की कथा और उनके स्वरूप को समझने के लिए उनके नाम और उनके रूप का भाव समझना बहुत महत्वपूर्ण है।

नवदुर्गा की परंपरा में माँ कालरात्रि को देवी दुर्गा का सातवाँ स्वरूप माना जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत उग्र बताया गया है। श्याम वर्ण, खुले केश, गर्दभ वाहन और हाथों में शस्त्रों के साथ उनका रूप शक्ति की प्रचंड अभिव्यक्ति को दर्शाता है। वहीं उनके अभय और वरद भाव भक्त के लिए सुरक्षा और कृपा का संदेश देते हैं। �

Drikpanchang

माँ के इस स्वरूप का सबसे बड़ा संदेश यही है कि जो शक्ति अधर्म और बुराई के लिए भयंकर है, वही शक्ति अपने भक्त के लिए करुणामयी और रक्षक बन जाती है।

माँ कालरात्रि के नाम में भी गहरा भाव छिपा है। “काल” समय, परिवर्तन और विनाश की शक्ति का स्मरण कराता है, जबकि “रात्रि” अंधकार का प्रतीक है। इस प्रकार माँ कालरात्रि का स्वरूप हमें जीवन के उस समय की याद दिलाता है जब मनुष्य चारों ओर से कठिनाइयों और भय से घिर जाता है।

ऐसे समय में मनुष्य को टूटने के बजाय अपने भीतर की शक्ति को पहचानना चाहिए।

माँ कालरात्रि का उग्र रूप हमें यही शिक्षा देता है कि जीवन में आने वाले अंधकार से डरकर पीछे नहीं हटना चाहिए।

जब मनुष्य के जीवन में परेशानी आती है, जब उसे भविष्य की चिंता सताती है, जब मन में भय पैदा होता है या जब कठिन परिस्थितियों में रास्ता दिखाई नहीं देता, तब माता का स्मरण मन को साहस देने वाला आध्यात्मिक सहारा बन सकता है।

माँ के हाथों में शस्त्र इस बात का प्रतीक माने जाते हैं कि बुराई और अधर्म का सामना करने के लिए शक्ति आवश्यक है।

वहीं माता के अभय भाव का अर्थ है—

“भय मत करो, मैं तुम्हारे साथ हूँ।”

इसी कारण माँ कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है। उनका बाहरी स्वरूप उग्र है, लेकिन भक्त के लिए उनका स्वरूप मंगलकारी माना जाता है।

माँ कालरात्रि की पूजा केवल बाहरी संकटों से रक्षा की प्रार्थना नहीं है। यह अपने भीतर के भय को पहचानने और उससे ऊपर उठने का भी अवसर है।

मनुष्य अपने जीवन में कई प्रकार के अंधकार से घिर सकता है—भय का अंधकार, चिंता का अंधकार, क्रोध का अंधकार, अज्ञान का अंधकार और निराशा का अंधकार।

माँ कालरात्रि का स्मरण करते हुए भक्त यह संकल्प ले सकता है कि वह इन कमजोरियों से हार नहीं मानेगा।

वह सत्य का साथ देगा।

वह धर्म का मार्ग अपनाएगा।

वह अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाएगा।

और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखेगा।

🌺 माँ कालरात्रि की कथा का सरल संदेश

माँ का उग्र स्वरूप हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि डर के ऊपर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देने वाला माना जाता है।

माता हमें यह विश्वास देती हैं कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, मनुष्य को अपने भीतर की ज्योति को बुझने नहीं देना चाहिए।

इसी भाव से सप्तम दिन माँ कालरात्रि की पूजा करके भक्त माता से प्रार्थना करता है—

“हे माँ! हमारे जीवन के अंधकार को दूर करें और हमें साहस, सद्बुद्धि तथा सही मार्ग प्रदान करें।”

🌺 14. माँ कालरात्रि का धार्मिक महत्व

नवरात्रि के सप्तम दिन माँ कालरात्रि की पूजा में भक्त विशेष रूप से निर्भयता, साहस, शक्ति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।

माता का उग्र स्वरूप बुराई और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक माना जाता है।

उनका अभय भाव हमें निर्भय रहने की प्रेरणा देता है।

उनका वरद भाव कृपा और आशीर्वाद का स्मरण कराता है।

इसलिए माँ कालरात्रि की पूजा का मूल भाव भय नहीं, बल्कि भय पर विजय है।

🙏 15. क्षमा प्रार्थना

पूजा के अंत में हाथ जोड़कर कहें—

आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥
फिर अपनी भाषा में कहें—

“हे माँ कालरात्रि! पूजा में जाने-अनजाने में जो भी भूल हुई हो, उसे क्षमा करें। मेरी श्रद्धा को स्वीकार करें और मेरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।”
🔱 ॥ जय माँ कालरात्रि ॥ 🔱
🌺 ॥ जय माता दी ॥ 🌺

🌺 प्रस्तुतकर्ता 🌺

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